राहुल के एक फैसले से बदल जायेगा बिहार का सियासत, कांग्रेस के पास वापसी का सुनहरा मौका

बिहार की सियासत 2013 से ही हमेशा सुर्खियों में रहा है क्योंकि 2013 में ही नीतीश कुमार ने मोदी के नाम पर NDA से गठबंधन तोड़कर अलग हो गए थे और 2015 आते-आते नीतीश कुमार की जदयू लालू यादव की राजद और कांग्रेस के संग गठबंधन करके यूपीए में शामिल हो गई और विधानसभा चुनाव में जबरदस्त जीत दर्ज की लेकिन 2017 का मध्य आते-आते ये गठबंधन भी नीतीश कुमार पसंद नही आया और वो ये भी गठबंधन तोड़कर भाजपा के साथ जाकर पुनः सरकार बना लिये और 2017 का अंत आते लालू प्रासाद को चारा घोटाला में कोर्ट ने दोषी बताते हुए जेल भेज दिया। कुल मिलाकर देखा जाए तो बिहार में सियासी उठापटक हमेशा हो रहा है।
इन सब को छोड़कर कांग्रेस की स्थिति देखें तो बिहार में कांग्रेस 2015 में कई चुनावो के बाद गठबंधन के साथ मिलकर 27 विधायक बनाने में कामयाब रही। कांग्रेस के अंदर भी हमेशा उठापटक जैसी स्थिति बनी रहती है। जदयू से गठबंधन टूटने के बाद कई महीने तक ये उठापटक काफी तेज था लेकिन तत्कालीन प्रदेश अध्यक्ष के हटने के बाद अब उठापटक शांत है।
बिहार की सियासी हालत ऐसी है कि जदयू बार-बार गठबंधन बदलने के कारण जनता का विश्वास खो चुका है और दो खेमो में बंट चुका है। भाजपा की केंद्र सरकार के जनविरोधी फैसलों और बढ़ती बेरोजगारी से जनता में भाजपा के खिलाफ गुस्सा है और राजद के सुप्रीमो लालू यादव के जेल जाने से राजद हिल चुका है। ऐसे में प्रदेश में कमजोर हो चुकी कांग्रेस के पास एक मौका है कि वो वापसी कर सके।
सूत्रों की माने तो ये कवायद कांग्रेस ने शुरू कर दी है और जल्द ही उसका असर नजर आने लगेगा। कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गाँधी बिहार के कई नेताओं से समर्पक में हैं जो जल्द कांग्रेस में शामिल हो सकते हैं जिससे ना सिर्फ कांग्रेस मजबूत होगी बल्कि उन नेताओ भी एक ठहराव मिलेगा।
सियासी गलियों में जो अटकलें लगाई जा रही है जिसके अनुसार कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गाँधी जिन नेताओ को कांग्रेस में शामिल करने के लिये उन से संपर्क में हैं उस मे सबसे बड़ा नाम है भाजपा के स्टारप्रचारक और पटना साहिब से सांसद शत्रुघ्न सिन्हा, दरभंगा से भाजपा सांसद कृति झा आजाद, कटिहार से सांसद तारिक अनवर, पूर्व मुख्यमंत्री जीतनराम मांझी, पूर्णिया के पूर्व सांसद उदय सिंह, कांग्रेस सांसद रंजीत रंजन के पति और मधेपुरा से सांसद पप्पू यादव, पूर्व मुख्यमंत्री जगन्नाथ मिश्र के पुत्र और राज्य सरकार के पूर्व मंत्री नीतीश मिश्रा इसके सहित कांग्रेस के वो पुराने चेहरे जो पार्टी छोड़कर चले गए हैं उनकी भी वापसी करवाई जाने वाली है और गुटों में वर्तमान PCC को एक मंच पर लाकर कांग्रेस को जमीन पर आंदोलन करने को कहेंगे।
कांग्रेस में सभी नेताओं की वापसी और गुटबाजी खत्म होने के बाद कांग्रेस बिहार के हर क्षेत्र और हर जाती के अनुसार कांग्रेस में चेहरा मौजूद होगा जिससे निश्चित ही कांग्रेस को बिहार में फायदा पहुँचेगा बशर्ते कांग्रेस अध्यक्ष सब को एक जुट कर एकला चलो की सिद्धान्त पर बिहार में अपनी लड़ाई जमीनीस्तर पर करें।
राहुल के एक फैसले से बदल जायेगा बिहार का सियासत, कांग्रेस के पास वापसी का सुनहरा मौका राहुल के एक फैसले से बदल जायेगा बिहार का सियासत, कांग्रेस के पास वापसी का सुनहरा मौका Reviewed by Unknown on December 28, 2017 Rating: 5

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