बनमनखी में पर्यटन स्थल को सड़क मार्ग से जोड़ने की उठी मांग
प्राचीन काल की धर्मपुर और अब की बनमनखी में कई पर्यटन स्थल हैं जो धर्म से जुड़ा हुआ है। चुकी बनमनखी का नाम धर्मपुर था इसलिये इस शहर के आसपास धर्म से जुड़ी पर्यटन स्थल बहुत हैं मगर एक सड़क मार्ग में न होने के कारण पर्यटकों को काफी दिक्कत होती है। खासकर के बाहर से घूमने आये पर्यटको सड़क ढूंढने में काफी परेशानी होती है इसलिये सभी पर्यटक स्थलों को एक मार्ग में लाने के लिये स्थानीय लोगो ने मांग की है।
बनमनखी नगर पंचायत वार्ड 10 के नगर पंचायत कार्यालय के समीप से स्वामी विवेकानंद चौक होते हुए जाने वाली सड़क जो आनंदी जानकी महिला महाविद्याल होकर कई टोला-मोहल्ला होते हुए बनमनखी के सुप्रसिद्ध पर्यटन स्थल महर्षि महिं दास आश्रम होते हुए राष्ट्रीय राजमार्ग 107 पर नरसिम्ह मन्दिर के सामने निकलती है।
महर्षि महिं दास के अनुयायी विश्व भर में हैं चुकी महर्षि महिं दास का जन्म बनमनखी में हुआ था तो उनके जन्म स्थल को देखने उनके अनुयायी विश्व भर से आते हैं।
इसी सड़क के सामने से नरसिंह अवतार स्थल जाने के लिये एक सड़क है ये नरसिम्ह मन्दिर उस पौराणिक घटना की धरोहर है जिसमे भक्त प्रह्लाद को हिरण्यकश्यप से बचाने हेतु भगवान विष्णु ने नरसिम्ह का अवतार लिया था। नरसिम्ह मन्दिर प्रांगण में होलिका दहन के अवसर पर भव्य कार्यक्रम का आयोजन होता है जिसे देखने बिहार के आस-पास के पर्यटकों के सहित नेपाल के पर्यटक भी आते हैं।
इस स्थल तक ले जाने वाली सड़क आगे जाकर नहर पर खत्म हो जाती है। चुकी ये नहर मृतप्राय हो गया है और यहां पर आम जनता की आबादी नही है तो इसी नहर को सड़क के रूप में परिवर्तित किया जा सकता है। जिससे सभी धार्मिक स्थल एक सड़क से जुड़ जायेगी।
ये नहर आगे जाकर गढ़ की दुर्गा मंदिर आगे होकर निकलता है। इस दुर्गा मंदिर के बारे में पौराणिक कथा ये है कि जब सती ने भगवान शिव के अपमान के कारण आत्मदाह किया था और शिव ने सती के शरीर को टुकड़ो में बांटा था तो ह्रदय इसी स्थल पर गिरा था। ह्रदय गिरने के कारण ही इस जगह का नाम हदयनगर रखा गया। यहां दर्शन करने के लिये श्रद्धालु आते हैं।
ये नहर आगे बढ़ते हुए बनमनखी की सुप्रसिद्ध धर्म स्थल शिवनगरी धिमेश्वर धाम से मिलती है। पौराणिक मान्यता के अनुसार हिरणकश्यप इस शिव मंदिर की स्थापना की थी और वो प्रत्येक दिन शिव की पूजा करता था जिससे प्रसन्न होकर शिव ने उन्हें अनेको वरदान दिया था। इस मंदिर में सावन के महीने में मनिहारी गंगाघाट से भारी संख्या में श्रद्धालु कांवर लेकर आते हैं।
अगर नहर पर सड़क का निर्माण हो जाता है तो ये तीनो मन्दिर एक सड़क से जुड़ जायेगा। ये नहर आगे चलकर पुनः राष्ट्रीय राजमार्ग से जुड़ जाता है। अगर प्रशासन इस सड़क का निर्माण करवाता है तो ना सिर्फ पर्यटकों को आसानी होगी बल्कि एक धार्मिक सर्किट बन जायेगा जिससे निश्चित तौर पर बनमनखी के विकास में इसका सहयोग मिलेगा।
बनमनखी में पर्यटन स्थल को सड़क मार्ग से जोड़ने की उठी मांग
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January 01, 2018
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