कांग्रेस के लिये एकजुट होते राहुल के इर्द-गिर्द नेता और भाजपा में हड़कम्प :
राहुल गाँधी ने कांग्रेस के लिये स्थानीय नेताओं की लामबंदी कर उन्हें एकजुट करने का पूरा रोडमैप तैयार कर लिया है। जिस तरह से राहुल गाँधी ने गुजरात मे विभन्न संगठनों के युवा नेताओ और सामाजिक कार्यकर्ताओ को एकजुट कर एक मंच पर लाने में सफलता पाई और 22 साल के बाद सर्वाधिक विधानसभा में विजय हुए उसके बाद राहुल और कांग्रेस की थिंक-टैंक स्थानीय नेताओं की एकजुटता के महत्व को समझ गई है।
दूसरी तरफ भाजपा के अंदर खींचतान बढ़ता जा रहा है, मोदी-शाह के अगुवाई वाली भाजपा में 3 साल तक लगातार एकजुटता देखी जा रही थी जो जीत का सबसे बड़ा कारण बना था लेकिन पिछले 6 महीनों से लगातार भाजपा में उठापटक चल रहा है। गुजरात मे जहाँ हर दिन कोई न कोई मंत्री इस्तीफा की धमकी दे रहा तो दूसरी तरफ कर्नाटक में भी 6 से अधिक विधायक भाजपा छोड़ कांग्रेस में जाने की तैयारी कर चुके हैं। कर्नाटक में इसी साल चूनाव होने हैं ऐसे में ये भाजपा के लिये बड़ा झटका होगा।
कर्नाटक कांग्रेस ने दावा किया है कि भाजपा के विधायक, सांसद और पूर्व विधायक लगातार कांग्रेस की सम्पर्क में है लेकिन स्थानीय स्तर पर पहले से ही कांग्रेस के उम्मीदवार हैं इसलिये सभी को टिकट देने के शर्त्त पर पार्टी में नही जोड़ा जा सकता है। कर्नाटक में JDS के कई विधायक पहले ही कांग्रेस का दामन थाम चुके हैं ऐसे में अगर भाजपा के विधायक भी हाथ के साथ आते हैं तो 2018 मे निश्चित तौर पर कांग्रेस जीत के लिये पुनः पहली पसंद हो जायेगी क्योंकि अभी वर्तमान में सरकार कांग्रेस की ही है।
कांग्रेस के बिहार इकाई ने भी दावा किया है कि जदयू-राजद के नाराज नेता और कांग्रेस छोड़कर जा चुके कई नेता जल्द ही कांग्रेस में शामिल हो सकते हैं। बिहार में नीतीश कुमार के साथ सरकार बनाने के बाद से ही लगातार मोदी सरकार बिहार की अनदेखी कर रही है जिससे यहां के स्थानीय नेताओं में थोड़ा नाराजगी है। जदयू-भाजपा गठबंधन के बाद कई ऐसे सीट हैं जहां दोनों के मजबूत नेता की दावेदारी है ऐसे में टिकट पक्का न देखते हुए वो कांग्रेस में जाने की तैयारी कर रहे हैं वही कई ऐसे नेता भी हैं जिसे नीतीश मन्त्रिमण्डल में जगह या उचित सम्मान न मिलने से भी वो नाराज है और वो कांग्रेस में वापसी पर विचार कर रहे हैं।
राहुल गाँधी की अध्यक्षता वाली कांग्रेस अब हर राज्य की स्थानीय मुद्दों, स्थानीय नेता और मजबूत चेहरा की तलाश में है जिससे वो स्थानीय नेताओं को एकजुट कर चुनावो में बेहतर प्रदर्शन दोहरा सके। पिछले कुछ समय से कांग्रेस की हार की कारण भी स्थानीय चेहरा और स्थानीय मुद्दों का आभाव रहा है।
राहुल गाँधी अब ने खुद को विपक्ष के एक मजबूत नेता के रूप में स्थापित कर लिया है। अब विपक्ष का हर क्षेत्रीय निर्वादित राहुल के चेहरे को स्वीकार कर रहा है वही दूसरी तरफ NDA की घटक दल भी मोदी और भाजपा पर लगातार हमलावर है। सूत्रों के अनुसार महाराष्ट्र में शिवसेना और बिहार में रालोसपा+लोजपा+हम उचित सम्मान नही दिए जाने के कारण जल्द ही गठबंधन से निकलने का फैसला ले सकती है जबकि वही कांग्रेस दक्षिणी राज्यो के नेताओ और क्षेत्रीय दलों को भी एकजुट कर कांग्रेस गठबंधन में शामिल करने की प्रयास में लगी हुई है।
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कांग्रेस के लिये एकजुट होते राहुल के इर्द-गिर्द नेता और भाजपा में हड़कम्प :
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January 02, 2018
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