कर्नाटक में कांग्रेस की "मिशन विजय" की तैयारी पूरी, अब राहुल गाँधी के प्रचार से बड़ी जीत की रखी जायेगी नींव
2018 में 8 राज्य में चुनाव होना है जिसमे 3 कांग्रेस शासित राज्य कर्नाटक, मिजोरम और मेघालय, 3 भाजपा शासित राजस्थान, मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ और 2 अन्य दल शासित राज्य है जिसमे त्रिपुरा में वाम दल की सरकार है तो वही नागालैंड में NPP की सरकार है। 2018 मे भीषण चुनावी संग्राम होने की उम्मीद है क्योंकि जहाँ एक तरफ़ कांग्रेस हर हाल में चुनाव जीतकर अपनी घट रही जनाधार को वापस खुद में जोड़ेगी तो वही भाजपा अपने विजय राज्यो एक और नाम शामिल करने कि प्रयास करेगा तो क्षेत्रीय दल भी अपनी शक्ति प्रदर्शन करेगी।
कर्नाटक में कांग्रेस की तैयारी जोरों पर है कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्दएमर्य्य्या कोई भी रिस्क लेने और अंत समय मे काम को निपटाने के लिये कुछ नही छोड़ रहे हैं वो हर काम व्यवस्थित ढंग से कर रहे हैं। चुकी कर्नाटक में कांग्रेस की सरकार ने अभूतपूर्व विकास किया है और भ्रष्टाचार के कोई मामला सामने नही आया है तो भाजपा के पास सिर्फ एक हिन्दू-मुस्लिम को लड़वाने का मुद्दा और कांग्रेस को हिन्दू विरोधी कहने के अलावा कुछ नही है। सिद्दएमर्य्य्या को भाजपा का ये मुद्दा और आरोप भली भांति पता है इसलिये वो इसकी भी तैयारी कर चुके हैं।
कांग्रेस ने पिछले 6 महीना में सदस्यता अभियान चलाकर लगभग 8 लाख नए कार्यकर्ता को पार्टी से जोड़ा है और हर बूथ पर 15 सदस्यों की कमिटी का निर्माण किया गया है जिसमे राहुल गाँधी की फॉर्मूला 1 बूथ 10 यूथ का प्रयोग किया गया है। हर विधानसभा के लिये सम्भावित उम्मीदवार का चयन प्रक्रिया भी लगभग पूरी हो चुकी है और उन्हें क्षेत्र में प्रचार करने के लिये भी भेज दिया गया है। कांग्रेस के कार्यकर्ता राज्य सरकार के काम और केंद्र सरकार की नाकामयाबी को हर क्षेत्र के घर-घर पहुंचाने का काम बखूबी कर रही है। जिससे जनता भी कांग्रेस से जुड़ रही है।
कांग्रेस की सदस्यता अभियान, घर-घर प्रचार और हर मुद्दे पर पहले से तैयारी रखने के कारण कांग्रेस का जनाधार बढ़ता जा रहा है। कांग्रेस के बढ़ते जनाधार और जीत की संभावना देख कर JDS और भाजपा के कई नेता और वर्तमान विधायक कांग्रेस मे शामिल होकर टिकट लेने की प्रयास में लगे हैं और पार्टी के नेताओ से सम्पर्क में हैं लेकिन इस पर अंतिम फैसला राहुल और सिद्दएमर्य्य्या लेंगे, चुकी कांग्रेस का हर जगह अपना नेता है और ऐसे में बाहरी नेता को टिकट देना मुश्किल होगा ये बात कर्नाटक प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष ने भी स्वीकारा है।
भाजपा अध्यक्ष अमित शाह और PM नरेंद्र मोदी किसी भी राज्य में इतने आसानी से हार मानने वाले नही हैं इसलिये वो भी कर्नाटक में लगातार अपनी जनाधार बढ़ाने की प्रयास कर रहे हैं। भाजपा येद्दयुरप्पा को समाने रख चुनाव लड़ने पर विचार कर रही है लेकिन येद्दयुरप्पा के भ्रष्टाचार और भाजपा के द्वारा धार्मिक मुद्दों को आगे बढ़ाकर विकास को बाधित करने की प्रयास से कर्नाटक की जनता में खास कर के युवा वर्ग में भाजपा को लेकर विश्वास बहाल नही हो रहा है।
कांग्रेस की तैयारी लगभग पूरी हो चुकी है और इस तैयारी को अंतिम रूप देने और तूफानी चुनावी प्रचार करने के लिये कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गाँधी 20 जनवरी के बाद कर्नाटक में रहेंगे। कांग्रेस कर्नाटक में सिर्फ जीत नही बल्कि एक बड़ी जीत चाहती है जिससे पूरे देश मे कांग्रेस की वापसी का संदेश जाए और आने वाले राज्यो के चुनावो में कांग्रेस को इसका फायदा पहुंचे। राहुल गाँधी और सिद्दएमर्य्य्या इसको लेकर हर स्तर की तैयारी को अंजाम देकर चुनाव प्रचार में उतड़ने को अब तैयार हैं।
कर्नाटक में कांग्रेस की "मिशन विजय" की तैयारी पूरी, अब राहुल गाँधी के प्रचार से बड़ी जीत की रखी जायेगी नींव
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January 03, 2018
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