जब देश के हर नेता की लोकप्रियता घट रही तब राहुल गाँधी की लोकप्रियता जबरदस्त बढ़ी है
भारतीय राजनीति में नेताओ का उभार और ढलान को कोई नई बात नही है, बहुत ही कम ऐसे नेता आए हैं जिन्होंने हमेशा भारतीय के दिलो पर राज की है। खासकर के 1990 के बाद ऐसे नेता नही मिलते हैं जिन्हें हमेशा सराहा गया हो।
ऐसे में वर्तमान में भी कुछ नेता उभर रहे हैं तो कुछ नेता अपने राजनैतिक जीवन के ढलान के तरफ अग्रसर हो गए हैं। पिछले कुछ समय मे हुए राजनैतिक हलचल के बाद कई नेताओं ने विश्वास खो दिया है तो कुछ नेताओ ने पुनः अपना विश्वास वापस लौटाया है।
2012 के गुजरात चुनाव के परिणाम के साथ ही नरेंद्र मोदी राष्ट्रीय राजनीति के तरफ बढ़ने लगे और वो अपने भाषणों से हर तरफ छा गए जिसमे उन्हें मीडिया का भरपूर सहयोग मिला और अंततः 2014 में उन्होंने केंद्र में सरकार बनाने में कामयाबी पाई। 2014 में PM बनने के बाद मोदी अपने कैरियर के उभार पर ही रहे लोगो का विश्वास उन पर बढ़ा, बिहार और दिल्ली को छोड़ हर तरफ उन्होंने जीत दर्ज करने में कामयाबी पाई मगर 2016 के अंत के बाद से उनकी लोकप्रियता घटती जा रही है। कहा जा सकता है कि मोदी अब अपने राजनैतिक ढलान पर अग्रसर हो गए हैं। नोटबन्दी और GST से जहां किसान, उद्योग और व्यपार चौपट हुआ है तो वही रोजगार ना मिलने से युवा भी आक्रोशित हुए हैं। मोदी लगातार विकास की बात से किनारा कर धर्म के नाम पर चुनाव लड़ने की प्रयास कर रहे हैं जिस कारण से युवाओ और मध्यमवर्गीय गरीब लोगों में आक्रोश बढ़ रहा है। कुल मिलाकर मोदी अब उभार के बाद अपने ढलान के तरफ बढ़ चुके हैं।
2011 में शुरू हुए अन्ना आंदोलन से अरविंद केजरीवाल का राजनैतिक जन्म हुआ। केजरीवाल ने 2013 में अल्प बहुमत की सरकार बनाई और सिर्फ 49 दिन में इस्तीफा दिया और फिर 2015 में प्रचंड बहुमत की सरकार बनाई। दिल्ली के बाद हर तरफ केजरीवाल का प्रभाव बढ़ रहा था मगर खुद की पार्टी के नेताओ से अविश्वास के कारण केजरीवाल कमजोर हुए और फिर बौखलाहट में कई गलतियां की और वैसे जगह पर चुनाव लड़ा जहाँ से साफ सन्देश गया कि केजरीवाल सिर्फ कांग्रेस का वोट काटकर बीजेपी को विजय बना रहे हैं। जिसके बाद धीरे-धीरे केजरीवाल का राजनीतिक उभार समाप्त होने लगा और वो ढलान के तरफ बढ़ गए और अब राष्ट्रीय राजनीति में उनके लिये कोई खास जगह नही बचा।
तीसरा मोर्चा कहा जाने वाला क्षेत्रीय दलों में वैसे तो कई नेता हैं मगर राष्ट्रीय राजनीति में पकड़ रखने वाले नाम कम हैं लेकिन नीतीश कुमार ने NDA से अलग होकर खुद को एक चेहरा के रूप में स्थापित करने में कामयाबी प्राप्त कर ली थी लेकिन बार-बार गठबंधन बदलने के कारण नीतीश कुमार ने ना सिर्फ अपना विश्वसनीयता खत्म कर ली साथ-साथ मोदी के साथ आ जाने के कारण उनका व्यक्तित्व छोटा लगने लगा है ऐसे में वो अब राष्ट्रीय रणनीति के दावेदार नही हैं।
कांग्रेस पिछले कुछ समय से ढलान पर आई थी मगर अब कहा जाने लगा है कि कांग्रेस के उभार का समय प्रारंभ हो गया है। राहुल गाँधी जब राजनीति में आए थे तो उन्होंने गजब प्रदर्शन करते हुए पूरे देश के राजनीति पर खासकर के युवावर्ग पर जबरदस्त पकड़ बनाई मगर कई वजह और मीडिया के द्वारा जबरदस्त झूठी प्रचार के बाद उनकी लोकप्रियता घटने लगी थी मगर पिछले कुछ समय से राहुल ने पुनः वापसी की है और अपना विश्वास पुनः बहाल किया है और PM मोदी तक को इस बात से चिंतित कर दिया है कि अब विपक्ष में एक मजबूत नेता है। राहुल ने ना सिर्फ इस बदलाव से कांग्रेस के गठबंधन दलों में तारीफ पाई है बल्कि भाजपा के नेता और गठबंधन दल ने भी खुलकर राहुल का तारीफ किया। राहुल ने 2017 के अंत तक ये बात स्पष्ट कर दिया कि आने वाले चुनावों में भाजपा को बड़ी चुनौती मिलने वाली है। कांग्रेस का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने के बाद राहुल और अधिक आक्रामक होकर मोदी से ट्वीट के जरिये सवाल कर रहे हैं और पार्टी में हर बात का खुद से निरक्षण कर पार्टी के अंदर बदलाव कर रहे हैं।
जब हर दल के नेता का जनता में विश्वास घटा है ऐसे में राहुल ने कांग्रेस की वापसी करवाने का प्रयास किया है और जनता में अपना विश्वसनीयता बहाल किया है। अब 2018 और 2019 में मोदी बनाम राहुल की जबरदस्त संग्राम देखने के लिये लोग तैयार हैं।
जब देश के हर नेता की लोकप्रियता घट रही तब राहुल गाँधी की लोकप्रियता जबरदस्त बढ़ी है
Reviewed by Unknown
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January 05, 2018
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