मनमोहन के सामने फिर बौने साबित हुए मोदी, भारत का विकास दर न्यूनतम स्तर पर
भारतीय अर्थव्यवस्था एक वक्त ऐसा हो गया था की भारत को अपना सोना गिरवी रखना पड़ा था लेकिन उसके बाद विश्व के सर्वश्रेष्ठ अर्थशास्त्रीयों में सुमार डॉ मनमोहन सिंह ने वित्त मंत्रालय संभाला और भारतीय अर्थव्यवस्था को पुनः पटरी पर लौटाया और भारतीय अर्थव्यवस्था को इतना सबल किया कि भारत विश्व की तीसरी सबसे बड़ी आर्थिक शक्ति के रुप में उभर कर समाने आई। विश्व भर का नजर भारत आर्थिक हलचल पर टिक गया। भारत हर दिन आर्थिक तौर पर मजबूत होने लगा और सारी रिकॉर्ड को तोड़कर एक विकसित अर्थव्यवस्था की तरफ कदम बढ़ा लिया और विश्व की सबसे तेज गति से विकास होने वाला अर्थव्यवस्था बना।
जब पूरा विश्व आर्थिक मंदी के दौर से गुजरा तब डॉ मनमोहन सिंह ने PM से बढ़कर एक अर्थशास्त्री के रूप में अपनी कार्यकुशलता का परिचय दिया और ना सिर्फ भारत की विकास दर को बनाये रखा बल्कि नई रोजगार का अवसर उपलब्ध कराकर पूरे विश्व को चौंका दिया। मन्दी में भी भारत का विकास दर और निवेश का स्तर बढ़ता जा रहा था। जब पूरा विश्व अपने कर्मचारियों को निकाल रहा था तब भारत लोगो को रोजगार दे रहा था और सामाजिक कल्याण का वैसा योजना बना रहा था जिसमे सरकार के खजाना से भारी-भड़कम राशि निकल रही थी।
भारत हर तरफ मजबूती से आगे बढ़ने लगा था मगर राजनैतिक स्थिति ऐसी बदली और मीडिया एवं विपक्षी दल ने झूठे मुद्दों को ऐसे प्रचारित किया कि सरकार बदल गई। सरकार के बदलते ही बदलाव दिखने लगा। सरकारी एजेंसी में ऐसे लोग आने लगे जो उस क्षेत्र के जानकार नही थे और कुशल व्यक्तियों को पद से हटने पर विवश कर दिया गया। पुरानी सरकार के सुधार के कारण शुरुआती समय मे तो विकास दर अच्छा रहा मगर नए सरकार के फैसलों से विकास दर घटने लगा।
नरेंद्र मोदी ने जब नोटबन्दी और नई प्रकार की GST की शुरुआत की तब डॉ मनमोहन सिंह ने मोदी को चेताया और कहा ये फैसला अर्थव्यवस्था के लिये आत्मघाती होगा और इससे देश का विकास ठप हो जायेगा एवं विकास दर में कमी आयेगी लेकिन मोदी ने जीत की घमण्ड और अल्पज्ञान के कारण डॉ मनमोहन सिंग का माजक उड़ाया और उनका अपमान किया। डॉ मनमोहन सिंह लगातर सरकार को इस बात की ओर ध्यान दिलवाने की प्रयास किए की भारत का अर्थव्यवस्था केंद्र सरकार के निकम्मी फैसलों से बर्बाद होने के स्थिति मे पहुंच चुकी है लेकिन सरकार और मीडिया ने देश को धर्म और जाति को लड़ाई, मन्दिर-मस्जिद और देशभक्ति के झूठे मामलों में उलझाये रखा जिसका नतीजा अब भारतीय अर्थव्यवस्था के बदहाली के रूप मे सामने आ रहा है।
आपको जानकर आश्चर्य होगा मगर भारत की अर्थव्यवस्था उस स्थिति पर पहुंच गई है जहाँ सरकार को अपना खर्च चलाने के लिये 55 करोड़ रुपये कर्ज के रूप में लेना पड़ रहा है जबकि एक समय ऐसा था जब भारत दूसरे देशों को करोड़ो रूपये दान और मदद के नाम पर देता था।
भारत का विकास दर ही नही हर क्षेत्र में भारत को झटका लग रहा है। भारत का विकास दर जहां न्यूनतम स्तर 6% पर पहुंच गई है तो वही दूसरे तरफ देश मे नया निवेश 13 साल के न्यूनतम स्तर पर है। बैंक क्रेडिट ग्रोथ में सबसे बड़ा झटका लगा है और वो 63 साल के सबसे निचले स्तर पर है। नया रोजगार 8 साल के न्यूनतम स्तर और है। कृषि विकास दिया 1.7% हो गया है जो 8 साल का न्यूनतम स्तर है। रुके हुए प्रोजेक्ट की संख्या दुगनी हो गई है जो इतिहास में सबसे अधिक है और जो बता रहा है सरकार सिर्फ नई प्रोजेक्ट बना रही है मगर पूरा नही कर रही।
अब मोदी को भी समझ आ रहा होगा कि मनमोहन सिंह को विश्व का सबसे बड़ा अर्थशास्त्री क्यों कहा जाता है और अमेरिका जैसे देश भी डॉ सिंह के सामने नमस्तक क्यों रहता है।
अगर मोदी ने घमण्ड और बेशर्मी छोड़कर मनमोहन सिंह के बातों पर ध्यान दिया होता तो शायद देश का अर्थव्यवस्था इस तरह से बदहाल नही होता।
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January 05, 2018
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